::गढ़ गिरनार केलेकोट गुजरात पर शासन :: खीर के तीन पुत्र चूड़ा ,समा ,सरवरिया हुए । उनकी संतति ने गढ़ गिरनार के...
::गढ़ गिरनार केलेकोट गुजरात पर शासन ::
खीर के तीन पुत्र चूड़ा ,समा ,सरवरिया हुए । उनकी संतति ने गढ़ गिरनार केलेकोट गुजरात पर शासन किया लाखा फुलाणी इनके वंशज थे । उन्होंने केलेकोट राज्य किया ।
संवत नो सो नव बीज तिथि थावर वार
जिन दिन लाखो जन्मियो फुल घर अवतार
:; रजु ::
महाराजा सुबाहु के पुत्र रजु राजा हुए उनके ११ रानिया थी। पडिहार राजा मधुसेन की पुत्री के कोख से सहदेव का जन्म हुआ ।
:: सहदेव :: राजा सहदेव के उतराधिकारी हुए सहदेव के चार पुत्र १ गजबाहू २ भोमजीत ३ तणुसेन ४ विक्रमसेण नामक हुए । :: ५९ राजा गजबाहू :: महाराजा गजबाहू ने युधिष्ठर संवत ३०८ में गुरु गर्गाचार्य से भूमि मांग कर गान्धार परदेस में गजनी नामक नवीन गढ़ का निर्माण कर अपनी राजधानी स्थापित की । :: दोहा :: तिनसत अठाशक धरम विसाखे सित तीन | रवि रोहणी गज बाहू ने गजनी रची नवीन || साको धर्म राजा तनो तीन सहस्र बल आठ || गज राजा गजनी तने तिन दिन तखत बयठ || रुत बसंत बेसाख सुदी तीज रोहिणी रविवार || राजा गज किय गजनी पहुंची सनगार || गजबाहू राजा अत्यंत प्रतिभासाली राजा हुए उन्होंने अपने अतुल पराक्रम से गान्धार प्रदेश से असंख्य मुस्लमान राजाओ को मारकर गजनी बसाई इस भयंकर संग्राम में खुरासान और रूम परदेश दोनों राजाओ के तीस हजार तुरक और उधर से चार हजार हिन्दू काम आये महाराजा गज का मथुरा से लाहोर मुल्तान और काबुल कंधार तक एकाधिकार राज्य हो गया ।
जय श्री कृष्ण
लगातार ......................
surendarsingh17@ट्विटर.com
खीर के तीन पुत्र चूड़ा ,समा ,सरवरिया हुए । उनकी संतति ने गढ़ गिरनार केलेकोट गुजरात पर शासन किया लाखा फुलाणी इनके वंशज थे । उन्होंने केलेकोट राज्य किया ।
संवत नो सो नव बीज तिथि थावर वार
जिन दिन लाखो जन्मियो फुल घर अवतार
:; रजु ::
महाराजा सुबाहु के पुत्र रजु राजा हुए उनके ११ रानिया थी। पडिहार राजा मधुसेन की पुत्री के कोख से सहदेव का जन्म हुआ ।
:: सहदेव :: राजा सहदेव के उतराधिकारी हुए सहदेव के चार पुत्र १ गजबाहू २ भोमजीत ३ तणुसेन ४ विक्रमसेण नामक हुए । :: ५९ राजा गजबाहू :: महाराजा गजबाहू ने युधिष्ठर संवत ३०८ में गुरु गर्गाचार्य से भूमि मांग कर गान्धार परदेस में गजनी नामक नवीन गढ़ का निर्माण कर अपनी राजधानी स्थापित की । :: दोहा :: तिनसत अठाशक धरम विसाखे सित तीन | रवि रोहणी गज बाहू ने गजनी रची नवीन || साको धर्म राजा तनो तीन सहस्र बल आठ || गज राजा गजनी तने तिन दिन तखत बयठ || रुत बसंत बेसाख सुदी तीज रोहिणी रविवार || राजा गज किय गजनी पहुंची सनगार || गजबाहू राजा अत्यंत प्रतिभासाली राजा हुए उन्होंने अपने अतुल पराक्रम से गान्धार प्रदेश से असंख्य मुस्लमान राजाओ को मारकर गजनी बसाई इस भयंकर संग्राम में खुरासान और रूम परदेश दोनों राजाओ के तीस हजार तुरक और उधर से चार हजार हिन्दू काम आये महाराजा गज का मथुरा से लाहोर मुल्तान और काबुल कंधार तक एकाधिकार राज्य हो गया ।
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