:: १३८ महाराजा सलिवाहन :; महाराजा सलिवाहन संवत २५१ को गढ़ गजनी के सिंहासन पर विराजे इनक...
:: १३८ महाराजा सलिवाहन :;
महाराजा सलिवाहन संवत २५१ को गढ़ गजनी के सिंहासन पर विराजे इनके ९ रानिया थी इनका विवाह दायमी राजा प्रतापचंद की पुत्री सोभागवती से दूजी राणी टाक पदमावती जम्बू की थी इनके पुत्र १ रिसालू २ पूर्णभक्त ३ बालबंध ४ धर्मगढ़ ५ श्री वत्स ६ कालक ७ पर्व ८ रूप ९ सुपेन १० लेख ११ जसकरण १२ नेम १३ झमाट १४ नेमक १५ गंगेव १६ जोगेव नमक थे कुंवर रिसालू जुवारिहुआ बहुत राजाओ से पड़ जीतो ७२ राजाओ की कन्या परणी कुंवर पूरण इश्वर भक्त था वह सत्यानिस्थ व् मर्यादावान था परन्तु पूरण भक्त की मासी लुनादे ने छल से पूरण के हाथ पांव कटवा के इसे कुवे में डलवा दिया गया [ गुरु गोरखनाथ जी ने पुनः जीवन दान दिया ] आगे जाकर पूरण नाथ बन गए नाथ संप्रदाय ने इन्हें सिध्ह चोरंगी नाथ के नाम से जाना जाता है इनका नाम इतिहास प्रसिद्ध है कुंवर रिसालू ने उज्जैन में जाकर राजा भोज की पुत्री को प्रश्नोत्तर करके विवाह किया जो निम्न प्रकार है
१ कोन तृण से तुच्छ --- मांगन
२ कोंन काजल से काला --- कलंक
३ कोन लोहे से कठिन --- सूम
४ कोन सोने से श्रेस्थ --- सपूत
५ कोन बिच्छू पर डंक --- कुवचन
६ कोन मदाराते मातो --- काम
७ कोन रवी पर तेज --- ज्ञान
८ कोन अग्नि से तातो --- क्रोध
९ कोन दूध से उज्जवल --- जस
१० कोन जिभ्या अमृत भरी --- सज्जन
दोहा
क्या नहीं अग्न में जले कहा नहीं सिन्धु समाय
[ धर्म ] [मन ]
कहा न अवलाक रम के काल क्या नहीं खाय
[ पुत्र ] [नाम ]
कोन पुर्ष जननी बिन कोन मोत बिन काल
[अजय ] [नींद ]
कोन सागर पाल बिन कोंन मूल बिन डाल
[विध्या ] [पवन ]
क्या घी जेसी चोपड़ी क्या वालो वीरा
:: शालिवाहन पुर स्यालकोट का निर्माण ::
महाराजा शालिवाहन ने पंजाब प्रान्त में अपने नाम से नवीन नगर शालिवाहन पुर स्यालकोट की स्थापना संवत २५१ विक्रमी को की यह आजकल पाकिस्तान में हे
:: शक संवत को चलाना ::
महाराजा शालिवाहन ने शको को परास्त करके इस विजय के उपलाख्स्य में शक संवत चलाया जो आज तक भारत में प्रचलित है
:: गजनी पर अधिपत्य ::
महाराजा शालिवाहन ने अपने पिता व चाचा का बदला लेने हेतु गजनी पर चढाई की तत्कालीन बादशाह जलालुधीन खुरासान का सूबेदार गाजिखान १४७०० सिपाहियों के साथ मारा गया इस युद्ध में दस हजार यादव सेना भी खेत रही गजनी पर पुनः हस्तगत कर कुंवर बालबंध को गजनी में रख महाराजा स्यालकोट आ गए
महाराजा शालिवाहन ने सारे पंजाब में एक चत्रधारी हूओ
:: अटक नदी पर गढ़ बनाया ::
महाराजा शालिवाहन ने अटक नदी पर नो करोड़ की लागत का गढ़ निर्माण किया
:: छपय ::
कोकणद मण संध कांछ पंचाल नरंतर
सेत बंध रामेसर गोतव दीपा सायर
झाड़खंड मेवाड़ खंड गुजर वेरागर
बागड़ महिपड़ सहित खेड़पाव पाबाकर
मरुधर खंड आबू मंडल सहित पाल इढा हंसवे
सालिवाहन जोति सुपह भोम सो यादव भोगवे
महाराजा शालिवाहना ५८ वर्ष ९ माह १ दिन राज किया
लगातार ............................
जय श्री कृष्णा
महाराजा सलिवाहन संवत २५१ को गढ़ गजनी के सिंहासन पर विराजे इनके ९ रानिया थी इनका विवाह दायमी राजा प्रतापचंद की पुत्री सोभागवती से दूजी राणी टाक पदमावती जम्बू की थी इनके पुत्र १ रिसालू २ पूर्णभक्त ३ बालबंध ४ धर्मगढ़ ५ श्री वत्स ६ कालक ७ पर्व ८ रूप ९ सुपेन १० लेख ११ जसकरण १२ नेम १३ झमाट १४ नेमक १५ गंगेव १६ जोगेव नमक थे कुंवर रिसालू जुवारिहुआ बहुत राजाओ से पड़ जीतो ७२ राजाओ की कन्या परणी कुंवर पूरण इश्वर भक्त था वह सत्यानिस्थ व् मर्यादावान था परन्तु पूरण भक्त की मासी लुनादे ने छल से पूरण के हाथ पांव कटवा के इसे कुवे में डलवा दिया गया [ गुरु गोरखनाथ जी ने पुनः जीवन दान दिया ] आगे जाकर पूरण नाथ बन गए नाथ संप्रदाय ने इन्हें सिध्ह चोरंगी नाथ के नाम से जाना जाता है इनका नाम इतिहास प्रसिद्ध है कुंवर रिसालू ने उज्जैन में जाकर राजा भोज की पुत्री को प्रश्नोत्तर करके विवाह किया जो निम्न प्रकार है
१ कोन तृण से तुच्छ --- मांगन
२ कोंन काजल से काला --- कलंक
३ कोन लोहे से कठिन --- सूम
४ कोन सोने से श्रेस्थ --- सपूत
५ कोन बिच्छू पर डंक --- कुवचन
६ कोन मदाराते मातो --- काम
७ कोन रवी पर तेज --- ज्ञान
८ कोन अग्नि से तातो --- क्रोध
९ कोन दूध से उज्जवल --- जस
१० कोन जिभ्या अमृत भरी --- सज्जन
दोहा
क्या नहीं अग्न में जले कहा नहीं सिन्धु समाय
[ धर्म ] [मन ]
कहा न अवलाक रम के काल क्या नहीं खाय
[ पुत्र ] [नाम ]
कोन पुर्ष जननी बिन कोन मोत बिन काल
[अजय ] [नींद ]
कोन सागर पाल बिन कोंन मूल बिन डाल
[विध्या ] [पवन ]
क्या घी जेसी चोपड़ी क्या वालो वीरा
:: शालिवाहन पुर स्यालकोट का निर्माण ::
महाराजा शालिवाहन ने पंजाब प्रान्त में अपने नाम से नवीन नगर शालिवाहन पुर स्यालकोट की स्थापना संवत २५१ विक्रमी को की यह आजकल पाकिस्तान में हे
:: शक संवत को चलाना ::
महाराजा शालिवाहन ने शको को परास्त करके इस विजय के उपलाख्स्य में शक संवत चलाया जो आज तक भारत में प्रचलित है
:: गजनी पर अधिपत्य ::
महाराजा शालिवाहन ने अपने पिता व चाचा का बदला लेने हेतु गजनी पर चढाई की तत्कालीन बादशाह जलालुधीन खुरासान का सूबेदार गाजिखान १४७०० सिपाहियों के साथ मारा गया इस युद्ध में दस हजार यादव सेना भी खेत रही गजनी पर पुनः हस्तगत कर कुंवर बालबंध को गजनी में रख महाराजा स्यालकोट आ गए
महाराजा शालिवाहन ने सारे पंजाब में एक चत्रधारी हूओ
:: अटक नदी पर गढ़ बनाया ::
महाराजा शालिवाहन ने अटक नदी पर नो करोड़ की लागत का गढ़ निर्माण किया
:: छपय ::
कोकणद मण संध कांछ पंचाल नरंतर
सेत बंध रामेसर गोतव दीपा सायर
झाड़खंड मेवाड़ खंड गुजर वेरागर
बागड़ महिपड़ सहित खेड़पाव पाबाकर
मरुधर खंड आबू मंडल सहित पाल इढा हंसवे
सालिवाहन जोति सुपह भोम सो यादव भोगवे
महाराजा शालिवाहना ५८ वर्ष ९ माह १ दिन राज किया
लगातार ............................
जय श्री कृष्णा

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