हर कोई आने वाले को टकटकी भरी निगाहों से निहार रही थी वो कोटा। राष्ट्र की सेवा करते हुए अपना सबकुछ न्योछावर करने वाले शहीद हेमराज मी...
हर कोई आने वाले को टकटकी भरी निगाहों से निहार रही थी वो
कोटा। राष्ट्र की सेवा करते हुए अपना सबकुछ न्योछावर करने वाले शहीद हेमराज मीणा के विनोद कलां गांव से तीन किलोमीटर दूर खेत पर बने मकान में दूसरे दिन भी गमगीन माहौल छाया रहा। घर के बाहर लगे पांडाल में शहीद के पिता हरदयाल, भाई व कुछ जाति समाज के लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। इसी पांडाल के पीछे शहीद का परिवार कच्चे घरों के बीच रहता है। कच्चे घरों के आगे चौक में एक छोटा सा पांडाल महिलाओं के लिए बनाया हुआ था।
इसी पांडाल में शहीद की धर्मपत्नी मधुबाला अपनी गोद में तिरंगा रखे हुए अन्य महिलाओं के साथ बैठी हुई थी, बोलीं कि अब उसका तिरंगा से ही जीवन भर का नाता है। वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। उसके चारों बेटे-बेटियां अपने पिता की शहादत को लेकर यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विचारों को सुनकर उन्हें आत्मसात करते दिख रहे थे। चार वर्षीय शहीद के बेटे ऋषभ मीणा की तबीयत बिगड़ने से वह खामोश होकर अपनी माता की गोद में बैठकर देख रहा था।
सरपंच ने मंत्री से की गांव में स्मारक के लिए 5 बीघा भूमि की मांग
खाद्य आपूर्ति मंत्री के सामने ग्राम पंचायत विनोद खुर्द सरपंच प्रेम गुर्जर ने शहीद के स्मारक के लिए 5 बीघा भूमि आवंटन करने और चारदीवारी निर्माण के लिए 15 लाख रुपए स्वीकृत करने की मांग की। मंत्री ने 25 फरवरी के बाद जयपुर आकर मिलने का आश्वासन दिया। सरपंच ने कहा कि अतिक्रमण हटाकर पार्थिव देह के लिए चबूतरा बनाकर कुछ भूमि तो खाली करवा दी है, लेकिन इसके आसपास कुछ भूमि स्मारक के नाम पर आवंटित हो जाए जिससे शहीद स्मारक बनाया जा सके।


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