ये हैं इंदौर निवासी वंदना ठाकुर। फौजी पिता के हौसले के चलते बचपन में ही पाॅवर लिफ्टर और बॉडी बिल्डर बनने का सपना संजाेया। जम्मू में ह...
ये हैं इंदौर निवासी वंदना ठाकुर। फौजी पिता के हौसले के चलते बचपन में ही पाॅवर लिफ्टर और बॉडी बिल्डर बनने का सपना संजाेया। जम्मू में हुए आतंकी हमले में पिता शहीद हो गए। मां ने स्वेटर बनाकर दो बच्चों की परवरिश की। कैंसर ने उन्हें भी छीन लिया। बचपन का सपना पूरा करने की ठानी ताे परिवार व समाज ने विराेध किया। बाेले- लड़कियाें काे ये शाेभा नहीं देता। परिवार ने साथ नहीं दिया तो उन्हें छोड़कर छोटे बच्चों को ट्रेनिंग देकर जीवन-यापन किया और अभ्यास जारी रखा। अब वह प्रदेश की पहली महिला बॉडी बिल्डर हैं जिन्होंने हाल ही में राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग स्पर्धा में दूसरा स्थान प्राप्त किया। हालांकि पावर लिफ्टिंग में भी दो साल पहले गाेल्ड मैडल प्राप्त कर चुकी हैं। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का नाम राेशन करना का ख्वाब है।
5 साल की थीं तब आतंकी हमले में पिता हो गए थे शहीद
- वंदना रविवार को दशपुर जिला बॉडी बिल्डिंग संघ द्वारा आयोजित मिस्टर एमपी बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशिप में भाग लेने आई थीं। पिता कमलचंद्र सेना में नायक सूबेदार थे। उनकी पोस्टिंग बाॅर्डर पर होने से वंदना मां के साथ ननिहाल काशी में रहने लगीं। पिता बेटा और बेटी में अंतर नहीं करते थे। इस कारण बचपन से ही पाॅवर लिफ्टिंग और बाॅडी बिल्डिंग का शौक हो गया।
- वंदना जब 5 साल की थीं तब जम्मू में पोस्टिंग के दौरान आतंकी हमले में पिता शहीद हो गए। पेंशन से घर खर्च नहीं चलने पर मां ने स्वेटर बनाकर बेचे और छाेटे भाई मनाेज व वंदना का भरण-पाेषण किया। वंदना 18 साल की हुईं तो मां को कैंसर हो गया। खर्च बढ़ा तो पढ़ाई छूट गई। मां के निधन के बाद वंदना भाई मनोज के साथ पैतृक घर इंदौर आ गईं।
- जीवन-यापन के लिए छोटे बच्चों को ट्रेनिंग देना शुरू किया। खुद भी पाॅवर लिफ्टिंग, बाॅडी बिल्डिंग व फिटनेस मॉडलिंग शुरू की। परिजन ने विरोध किया। वे समझाने पर भी नहीं माने। इससे घर छोड़ दिया।
- 2017 में वंदना ने वर्ल्ड पाॅवर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीता। 2018 में राष्ट्रीय बॉडी बिल्डिंग स्पर्धा में मप्र से पहली बार भाग लिया और छठे स्थान पर रहीं।


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