फिल्मी घराने से लेकर कॉरपोरेट लॉबी और खेल जगत में भी माल्या का सिक्का चलता था. ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ बन गया ‘किंग ऑफ बैड टाइम्स’. जानें आखि...
फिल्मी घराने से लेकर कॉरपोरेट लॉबी और खेल जगत में भी माल्या का सिक्का चलता था. ‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’ बन गया ‘किंग ऑफ बैड टाइम्स’. जानें आखिर किस गलती की वजह से सब कुछ खो दिया माल्या ने...
ब्रिटेन ने भारतीय कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे दी है. माल्या पर भारतीय बैंकों के करोड़ों रुपये बक़ाया हैं और वो साल 2016 से ब्रिटेन में हैं. क़रीब दो महीने पहले लंदन की एक निचली अदालत ने माल्या के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दी थी. निचली अदालत के फ़ैसले के बाद ब्रिटेन के गृह मंत्री को इस पर फ़ैसला लेना था. ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जाविद ने अब माल्या के प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे दी है. ब्रिटेन के गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया, गृह मंत्री ने सभी मामलों पर सावधानी से ग़ौर करने के बाद तीन फ़रवरी को विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण के आदेश पर दस्तख़त किए. कभी भारत के मशहूर कारोबारियों में शुमार विजय माल्या के बर्बादी की कहानी पूरी फिल्मी है. कहा जाता है कि फिल्मी घराने से लेकर कॉरपोरेट लॉबी तक और खेल जगत में भी माल्या का सिक्का चलता था.‘किंग ऑफ गुड टाइम्स’बन गया‘किंग ऑफ बैड टाइम्स’. जानें आखिर किस गलती की वजह से सब कुछ खो दिया माल्या ने:
2007 में की थी ये बड़ी गलती: साल 2005 में विजय माल्या ने किंगफिश एयरलाइंस की शुरुआत की थी. उनका किंगफिशर एयरलाइंस को एक बड़ा ब्रैंड बनाने का सपना था. इसीलिए माल्या ने साल 2007 में देश की पहली लो कॉस्ट एविएशन कंपनी एयर डेक्कन का टेकओवर किया था. इसके लिए उन्होंने 30 करोड़ डॉलर यानी 1,200 करोड़ रुपए (2007 में 1 डॉलर लगभग 40 रुपए के बराबर था) की भारी रकम खर्च की थी. साल 2007 में किया गया एक सौदा माल्या के लिए सबसे बड़ी गलती साबित हुआ. इस सौदे के पांच साल के भीतर माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस बंद हो गई और उनका पूरा कारोबारी साम्राज्य लगभग खत्म हो गया.
दूसरी बड़ी एविएशन कंपनी: इस सौदे से माल्या को तत्काल फायदा तो हुआ और 2011 में किंगफिशर देश की दूसरी बड़ी एविएशन कंपनी भी बन गई. लेकिन, कंपनी एयर डेक्कन को खरीदने के पीछे के लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई और बढ़ती फ्यूल कॉस्ट ने ऑपरेशन लागत बढ़ा दी. इससे कंपनी को बड़ा घाटा उठाना पड़ा.
बंद हो गई किंगफिशर: माल्या ने एक और गलत फैसला लिया. माल्या ने एयर डेक्कन के साथ गोद लिए हुए बेटे की तरह व्यवहार किया. विलय के बाद माल्या को उम्मीद थी कि एयर डेक्कन के कस्टमर किंगफिशर की ओर रुख करेंगे, लेकिन इसका उल्टा होने लगा. आखिर में एयर डेक्कन (किंगफिशर रेड) के कस्टमर दूसरी लो कॉस्ट एयरलाइंस की ओर रुख करने लगे. इस प्रकार अक्टूबर 2012 में किंगफिशर एयरलाइंस बंद हो गई. इसका असर माल्या के कारोबारी साम्राज्य पर भी पड़ा, जो अब लगभग खत्म होने के कगार पर है.
क्यों हुई विजय माल्या की यह हालत: शराब का व्यवसाय उन्हें पिता विट्ठल माल्या से विरासत में मिला था. उन्होंने देश के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों से लोगों को चुना और इस शराब उद्योग को एक कार्पोरेट रूप दिया. लेकिन, झटके में नई कंपनियां खरीदने की उनकी आदत और कई बार तो बिना बही-खाते की जांच के ही फैसला लेने की वजह से विजय माल्या की यह हालत हो गई है. माल्या ने किंगफिशर एयरलाइन इस मकसद से शुरू की कि उन्हें शराब कारोबारी नहीं बल्कि शराब उद्योगपति समझा जाए. यही वजह थी कि वो अपनी एयरलाइन में यात्रियों को वो सारे सुख देना चाहते थे, जो कोई और कंपनी सोचती भी नहीं थी.






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