पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान देश के आर्थिक हालात को बेहतर करने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं. लेकिन कुछ भी ठीक नहीं हो रहा है. ऐसे...
आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से छह अरब डॉलर का बेल आउट पैकेज हासिल करने में सफल रहा था. 1980 के बाद पाकिस्तान के लिए आईएमएफ़ का ये 13वां बेलआउट पैकेज है.यह क़र्ज़ पाकिस्तान को तीन सालों के दौरान मिलेगा. हालांकि इस समझौते पर अभी बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की मुहर नहीं लगी है.

कितना है पाकिस्तान पर कर्ज़-आईएमएफ़ की वेबसाइट के मुताबिक़, पाकिस्तान पर पहले के बेलआउट से ही 5.8 अरब डॉलर का कर्ज़ है. पाकिस्तान पर क़र्ज़ और उसकी जीडीपी का अनुपात 70 फ़ीसदी तक पहुंच गया है. कई विश्लेषकों का कहना है कि चीन का दो तिहाई क़र्ज़ सात फ़ीसदी के उच्च ब्याज दर पर हैं.

कोई विदेशी निवेश नहीं-पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सबसे जटिल समस्या यह है कि कोई विदेशी निवेश नहीं आ रहा है. पाकिस्तान में वित्तीय वर्ष 2018 में महज 2.67 अरब डॉलर का निवेश आया था, जबकि चालू खाता घाटा 18 अरब डॉलर का रहा.
समस्या यह है कि लगातार कम होते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण पाकिस्तान को पास कोई विकल्प नहीं था.


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